Be Social with Priyanka || Part : 2 || SWAPNIL SAUNDARYA e-zine

SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine  

( Vol- 05, Year - 2018, SPECIAL ISSUE  )

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 Be Social with Priyanka


 
नारी सशक्तिकरण और सरकारी नीतियों की विफलता
 
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र्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने वर्ष 2015 में शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने भाषण में यह व्यक्त किया कि यदि परिवार की एक स्त्री शिक्षित होगी तो  वह दो परिवारों को शिक्षित करती है. प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय में स्त्रियों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आ  गया है . भारत  देश हमेशा से ही  आध्यात्म से जुड़ा है , यहाँ धार्मिकता व नैतिक मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाता है लेकिन पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव  ने भारतवासियों  की विचारधारा को बहुत प्रभावित किया है. 

आज के समय में लगभग हर जगह चाहे वह गांव हो या शहर हर जगह महिला सशक्तिकरण पर चर्चा हो रही है.....हम 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं........ लेकिन इसके वास्तविक मायने कितने लोग समझ पाते हैं यह कहना मुश्किल है. हमारे भारतीय समाज में इसको कितनी मान्यता मिल रही है, यह अनुसंधान करना बेहद कठिन है, हालांकि हमारे भारतीय समाज में महिलाओं की अवस्था में काफी सुधार हुआ है लेकिन जिस तरह स्वस्थ रूप से सुधार की कल्पना की जाती है, सुधार हो सकता था वैसा सुधार नहीं हुआ है, आने वाले समय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस दिशा में अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है. पहले की अपेक्षा महिलाओं की दशा में सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी देश की आधी आबादी अपने अनेक अधिकारों से वंचित है।


'नारी सशक्तिकरण' भौतिक या आध्यात्मिक , शारीरिक या मानसिक सभी स्तर पर महिलाओं  में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की क्रिया है . हम यह भी कह सकते हैं कि महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत महिलाओं से जुड़े सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक  और कानूनी मुद्दों पर  मुख्य रुप से  संवेदनशीलता और सरोकार व्यक्त किया जाता है जिसमें महिलाओं की स्थिति हमेशा से ही कमतर रही है. 

सरल शब्दों में परिभाषित करें तो हम यह कह सकते हैं कि महिलाओं में अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े हर काम का खुद निर्णय लेने की क्षमता होना ही सशक्तिकरण है.

वैश्विक स्तर पर नारीवाद आंदोलनों और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने महिलाओं की सामाजिक उन्नति, स्वतंत्रता , न्याय व राजनैतिक अधिकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह कहना किसी भी प्रकार से गलत न होगा  कि स्त्रियों ने ही सर्वप्रथम सभ्यता की नींव डाली है और उन्होंने ही जंगलों में भटकते पुरुषों का हाथ पकड़्कर उन्हें स्थिर जीवन प्रदान किया है , उनका घर बसाया है ........समाज , सभ्यता व संस्कृति के विकास में महिलाओं का  योगदान पुरुषों  से कम नहीं रहा  फिर भी वर्तमान समय में नारी सशक्तिकरण  का विषय इतना अधिक चर्चा में क्यों है ?

संविधान, सरकार से लेकर सामाजिक संगठन तक में महिला सशक्तिकरण की बात तो होती है लेकिन महिला सशक्त नही हो पाई हैं. महिला सशक्तिकरण की नीतियों में विफलता के पीछे का सबसे बड़ा कारण तो महिलाएं स्वयं ही हैं. उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न अधिकार प्राप्त हैं  लेकिन आज भौतिकवादिता के दौर में भी महिलाएं खुद को अपने धार्मिक विश्वास , परंपराओं से खुद को बंधा हुआ महसूस करती हैं.बहुत सी महिलाएं खासतौर पर ग्रामीण व घरेलू महिलाएं अपने अधिकारों के लिए जागरुक ही नहीं हैं जिसके परिणामस्वरुप  सरकार की नीतियां भी निरंतर  असफल हो रही हैं.

महिलाओं का राजनैतिक सशक्तिकरण इस समाज के  विकास की एक कुंजी है व अत्यंत आवश्यक है. राजनैतिक भागीदारी से घर , समुदाय व राष्ट्रीय स्तर तक वह अपना निर्णय लेने में सक्षम हो सकती हैं. आज सरकार के द्वारा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. वर्तमान समय में भारत सरकार महिलाओं के आर्थिक , राजनैतिक, सामाजिक विकास व सशक्तिकरण के लिए विभिन्न नीतियां बना रही हैं पर इन नीतियों का सफल क्रियान्वयन संभंव नहीं हो पा रहा है. इसके अलावा सामाजिक क्षेत्र में विवाह, विवाह विच्छेद , दहेज उत्पीड़न ,घरेलू हिंसा, शिक्षा से संबंधित अधिकार जो उन्हें सरकार द्वारा प्राप्त हैं , उनके प्रति भी कुछ  महिलाओं का नीरस रवैया देखने को मिलता है. दूसरी तरफ वे महिलाएं जो अपने सामाजिक अधिकारों के लिए जागरुक हैं उन्हें  समाज की रुढ़िवादी विचारधारा  रुपी  बेड़ियों में जकड़ लिया जाता है. भारत में पितृसत्तात्मक विचारधारा के कारण ऐसी महिलाओं का हर स्तर पर शोषण होता है.

समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार हेतु शिक्षा  एवं जागरुकता का विशेष महत्व है ...शिक्षा के माध्यम से महिलाएं अपनी सामाजिक स्थिति ,उनके प्रति होने वाले अन्याय , अत्याचार को समझ सकती हैं और उनसे निपटने हेतु उचित निर्णय लेने में सक्षम बन सकती हैं.........हिंदू कोड  बिल जो कानून  के माध्यम से संपत्ति का अधिकार, विवाह, विवाह विच्छेद , उत्तराधिकार आदि मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है.यह महिलाओं  के लिए क्रांतिकारी विधेयक है.
आर्थिक स्वतंत्रता भी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बेहद आवश्यक  है......... पर हमारे देश की विडंबना तो देखिये, आर्थिक क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं पर फिर भी अपनी मेहनत की कमाई को  वे अपनी मर्जी से खर्च करने के लिए स्वतंत्र नहीं. 

यह भी एक बड़ा दुर्भाग्य है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बनाई गई नीतियों को लागू करने वाले व्यक्ति भी महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं. जब नीतियां बनाने वाले और लागू करने वाले लोग ही सही प्रकार से  नीतियों को क्रियान्वित नहीं करेंगे तो आखिर कैसे महिलाएं सही मायनों में सशक्त हो पाएंगी.

यदि हमें महिलाओं के उत्थान से संबंधित नीतियों के सही परिणाम प्राप्त करने हैं तो इसके लिए यह आवश्यक है  कि हम भारतीय संस्कृति के मूल्यों को सही मायने में लोगों तक पहुंचाएं जिसके परिणामस्वरुप राजनैतिक परिदृश्य में प्रशासनिक नीतियां सही प्रकार से लोगों तक पहुँच सकें और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सके.


शिक्षा के  माध्यम  से संस्कृति का प्रसार किया जाए जिसके फलस्वरुप लोगों की अति भौतिकवादी  प्रवृत्ति जो पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित है, उसमें परिवर्तन लाया जा सके .समाज  में  स्त्रियों के प्रति सम्मान की भावना जागृत हो  क्योंकि महिलाओं के प्रति तंग नज़रिया व असम्मान की भावना ,महिलाओं के प्रति आपराधिक प्रवृत्तियों को जन्म देती  है. 

यह सत्य है कि महिला सशक्तिकरण तब तक संभव नही जब तक हमारे समाज के पुरुष प्रधान रवैये  में यह सोच पैदा न हो जाये कि महिला भी पुरुष से कम नहीं है साथ ही महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा और अपनी कार्यक्षमता से अपनी शक्ति का, खुद के सशक्त होने का परिचय देना होगा. महिलाओं को दिखाना होगा की नारी सिर्फ भोग की वस्तु नही है बल्कि वह भी समाज का अहम हिस्सा है. महिलाओं को जागना होगा और दिखाना होगा की वह लाचार नहींं हैं , उन्हें लाचार बनाया गया है. अब जागरूकता की परम आवश्यकता है, नारी को खुद को पहचानने की, अपने-आप को जानने की जरूरत है. अपने विकास, उन्नति, प्रगति समृद्धि और अधिकारों के लिए नारी हर पल चौकन्ना रहें, जागरूक बने और दूसरी नारी सशक्ति को भी प्रेरित करें. समाज का संतुलित विकास नारी के सशक्त होने पर ही सम्भव है.


-प्रियंका सिंह 
 सहा. प्रवक्ता ( समाजशास्त्र )
 महिला महाविद्यालय 



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वनस्थली विद्यापीठ , राजस्थान से जीव विज्ञान विषय में गोल्ड मेडल के साथ बी.एस.सी और समाज शास्त्र में परास्नातक व बी.एड  की उपाधियों से अलंकृत प्रियंका ( Priyanka Singh ) , सी टी ई टी  ( CTET ) व नेट  ( NET ) की परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर चुकी हैं . वर्तमान समय में महिला महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग में सहा. प्रवक्ता व एन.सी.सी का कार्यभार सँभालने के साथ -साथ महाविद्यालय की स्पोर्ट्स कनवेनर हैं. योगा में विशेष रुचि रखने वाली प्रियंका का मानना है कि वर्तमान समय में लोगों में शिक्षा का प्रतिशत तो बढ़्ता जा रहा है किंतु उनकी सोच व उनके विचारों में अभी भी संकीर्ण व दकियानूसी विचारधाराओं का समावेश है जो हमारे समाज के लिए हितकर नहीं. लोगों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन उनके स्वयं के चिंतन पर ही निर्भर करता है.





 


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स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन - परिचय
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